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Vidyanand Ji Maharaj,Jain Monk,,Jainism,Jain religion

Aacharya Shri Vidyanand Ji

गुरु जी परिचय

प. पू. श्वेतपिच्छाचार्य आचार्य श्री विद्यानन्द जी मुनिराज का सामान्य परिचय

पूर्व नाम – श्री सुरेन्द्र कुमार

जन्म स्थान – ग्राम शेडवाल ,जिला : बेलगाम (कर्नाटक )

जन्म तिथि – २२ अप्रैल १९२५

माता – श्रीमती सरस्वती बाई

पिता – :श्री कलाप्पा उपाध्याय

मुनि दीक्षा – जुलाई २५ , १९६३

स्थान – दिल्ली

एलाचार्य पद – नवम्बर १७ , १९७८ को दिल्ली में

गुरु – आचार्य श्री देशभूषण जी

रुचि – अध्ययन, अध्यापन, ध्यान, चिंतन, लेखन, संयम, अनशन, साधना, रस परित्याग, कथा वाचन, आदि

विशेष : आचार्य विद्यानन्द जी वर्तमान के पहले आचार्य है जिन्हें मुनि दीक्षा लिए ५० साल हो गए है ।

आचार्य श्री के विदेश में रहने वाले भक्तों को जब पता चला की भारत सरकार ने मयूर पंख पर प्रतिबन्ध लगाने का सर्कुलर निकल है तो उनको चिंता हुई कि हमारे गुरुदेव कि चर्या का निर्वाह केसे होगा।क्युकी शीघ्र ही चातुर्मास का शुभारम्भ होने वाला था।इसलिए उन्होंने वहा से यथा शीघ्र श्वेत मयूर पंख दिल्ली भिजवा दिए और उपाध्याय जी ने उसकी नूतन पिच्छी बना दी ।पूज्य आचार्य श्री को चातुर्मास स्थापना के शुभ दिन श्वेत मयूर पंखो से निर्मित पिच्छी समर्पित की।श्वेत पंखो की पिच्छी देखकर हजारों उपस्थित श्रावकों को आश्चर्य हुआ और सबने एक स्वर से आचार्य श्री को श्वेतपिच्छाचार्य की उपाधि से अलंकृत किया ।