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How to avoid dental problems ?

 

  “गुप्ति गुरु का यह  सन्देश स्वस्थ रहे अब अपना देश ” 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट में कहा गया है कि दांतों में मुख्यतः दो प्रकार की बीमारी होती है। पहलाय दांतों में कीड़ा लगना तथा दूसराए मसूढ़ों की बीमारी.जिसे सामान्य बोलचाल में पायरिया कहा जाता है। सही जानकारी और उचित देखभाल की कमी के कारण दांतों में बचपन से ही कीड़े लगने शुरू हो जाते हैं तथा समय के साथ.साथ यह बढ़ता चला जाता हैए जो दांत दर्द का सबब बनता है।
 मुँह शरीर का आईना है। मुख संबंधी स्वास्थ्य सही अर्थों में समग्र स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है और विश्व स्तर पर यह एक बड़ी चुनौती है।  ज्यादातर लोग मुख संबंधी स्वास्थ्य के साथ.साथ आम सेहत पर इससे पड़ने वाले असर से अनभिज्ञ हैं। दंत रोग व निदानों पर किये गये शोध व अनुसंधानों से पता चला है कि दांत और मसूढ़ों की बीमारी हृदय रोग व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की जनक है।

“मसूढ़ों की बीमारी हृदय  रोग और मधुमेह को जन्म देती है”

मसूढ़ों की बीमारी तथा उसके संक्रमण की वजह से शरीर के अन्य अंगों के संक्रमण का खतरा बना रहता है जिसमें हृदय की बीमारीए धमनियों की समस्याए मधुमेह का अनियंत्रित होना आदि शामिल हैं। दांतों को बीमारी से बचाने तथा उसकी उचित देखभाल के लिए छह महीने या साल में कम से कम एक बार दंत चिकित्सक के पास अनिवार्य तौर पर जाना चाहिए। भारत के कई शहरों में हुए सर्वेक्षणों से पता चला है कि यहां दांत से जुड़ी जरूरी जानकारी का अभाव है तथा खान.पान के प्रभाव के बारे में अधिकांश लोगों में अज्ञानता है। शरीर के अन्य अंगों का स्वस्थ होना दांत के स्वस्थ होने से जुड़ा है। मुंह व्यक्ति के व्यक्तित्व को दर्शाता है लेकिन दांत और मसूढ़ों में रोग के लक्षण इस पर नकारात्मक असर डालते हैं। दांत तथा मसूढ़ों से जुड़ी छोटी.छोटी जानकारी व्यक्ति को कई अन्य गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।

दांतों की नियमित देखभाल के लिये आवश्यक है कि:
  • खाना खाने के बाद जीभ तथा दांत की अच्छी तरह सफाई करें।
  • दो दांतों के बीच का हिस्सा अच्छी तरह साफ करना अंनिवार्य है वरना वहां धीरे.धीरे कीड़े लगने शुरू हो जाते हैं जो बाद में दांत दर्द की समस्या बनकर उभरते हैं
  • दांतों को स्वस्थ रखने के लिए अधिक मीठा खाने से परहेज करना चाहिए। ऐसी चीजों को खाने से बचना चाहिए जो दांतों तथा मसूढ़ों से चिपक जाते हैं जैसे बिस्कुटए चॉकलेटए पिज़्ज़ाए बर्गरए आईसक्रीम आदि।
  • दांतों को मजबूत तथा निरोग रखने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
दाॅंत र्दद को नज़र-अंदाज़ न करेंः

दर्द जहां भी होता है और जब होता है तभी उस दर्द के होने वाले हिस्से की उपयोगिता समझ में आती है सब दर्दों का राजा होता है दाॅंत का र्दद यह ऐसा दर्द है जो शुरुआत में बहुत मीठा लगता है कुछ लोग इसी मिठास को टीसना भी कहते हैं फिर शुरू होने के बाद लुका छुपी खेलना शुरू कर देता है कभी लगेगा इधर हो रहा है  कभी लगेगा उधर चला गयाद्य कभी गुस्से में बेचारे मसूढ़े को फुला देगा कभी कान के नीचे तक दर्द की लकीर सी बना देता हैद्य मजे की बात है  यही दर्द एकमात्र ऐसा दर्द है जिसका लोकस ड्रा किया जा सकता है|

प्रकृति ने दाँत के दर्द को इतना महत्व इसलिए दिया हैए जिससे हम लोग इसका प्रयोग अत्यंत सावधानी के साथ करेंद्य यह सोच कर लापरवाही न करें कि ये तो ३२ दाँत हैंए एकाध टूट भी गए तो क्याघ् जीवन जीने के लिए भोजन प्रमुख आवश्यकता है और भोजन के लिए मुख में दाँत सर्वाधिक महत्वपूर्णद्य इसीलिए सर्वाधिक दर्द का समावेश भी दांतों के साथ ही प्रकृति ने किया है|

दाॅंत र्दद सर्वाधिक पाई जाने वाली बीमारीः

दुनिया में करीब 90 फीसदी लोगों को दांतों से जुड़ी कोई न कोई बीमारी या परेशानी होती है लेकिन ज्यादातर लोगबहुत ज्यादा दिक्कत होने पर ही डेंटिस्ट के पास जाना पसंदकरते हैं। इससे कई बार छोटी बीमारी सीरियस बन जाती है।अगर सही ढंग से साफ . सफाई के अलावा हर 6 महीने में रेग्युलर चेकअप कराते रहें तो दांतों की ज्यादातर बीमारियों कोकाफी हद तक सीरियस बनने रोका जा सकता है।

उपाध्याय गुप्ति सागर मुनि महाराज जी का  मुख स्वास्थ्य को लेकर लक्ष्यः.

 

विगत चार दशकों से बेहतर जन . स्वास्थ्य की सम्प्राप्ति के विषय में मैं समय.समय प्रबोधन के साथ.साथ चिकित्सा शिविरों के आयोजनों के लिए प्रेरणा देता रहा हूँ और मुझे प्रसन्नता है कि शताधिक शिविरों का भारत के विभिन्न शहरोंध्गावोंध्कस्बों में आयोजन भी सफलता के साथ संपन्न हुआ है। अब मेरी भावना स्वास्थ्य चेतना को मिशन के तौर पर अपनाने की है ताकि कालबद्ध कार्यक्रमों के साथ सफलता के नव कीर्तिमान स्थापित किये जा सकें।

मुख स्वास्थ्य क्रांति शुरू करने के अभियान का बीड़ा इसी दृष्टिकोण से मैंने उठाया है। मेरी भावना है कि इसके माध्यम से समग्र स्वास्थ्य के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा और युवा तथा प्रगतिशील भारत शक्तिशाली भारतए स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मन की शक्ति अर्जित कर विश्व को सकारात्मक नेतृत्व प्रदान करेगा शीघ्र ही। बिना अच्छे स्वास्थ्य के आध्यात्म के मार्ग की यात्रा भी नहीं की जा सकती हैए क्योंकि साधना और तपश्चर्या के लिए शरीर को बिना किसी उहापोह के सहने की शक्ति होनी चाहिए और बिना किसी संक्लेश के संहनन की सम्प्राप्ति के लिए बेहतर स्वास्थ्य एक अपरिहार्यता है।

तो आइयेए इस अभियान में संकल्पपूर्वक जुड़ियेए बेहतर मुख स्वास्थ्य की दिशा में बढ़िए. स्वस्थए मजबूत और चमकीले दांतों के माध्यम से स्वस्थ शरीर की प्राप्ति के अभीष्ट को प्राप्त कीजिये। आप बेहतर स्वास्थ्य से बेहतर आध्यात्म के सम्यक मार्ग पर प्रस्थान कर अपनी आत्मा का कल्याण करें.यही मेरे चित्त के मंगल भाव हैं और आपके चतुर्दिक अभ्युदय के लिए हैं मेरे अनंत आशीष भी।

 

 

further details can be found at : http://swasthyabharatmahaabhiyaan.com/

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